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एक नहीं अनेक

5 months ago 108

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एक लोकप्रिय धारावाहिक में राम की बड़ी बहन, शांता, को दर्शाया गया है। वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के अनुसार वे दशरथ और कौशल्या की पुत्री थी। उन्हें अंग के राजा, रोमपद, को दत्तक दिया गया। उन्होंने ऋश्यश्रृंग ऋषि से विवाह किया, जिन्होंने वह यज्ञ किया जिससे दशरथ को चार पुत्र प्राप्त हुए थे। यह कहानी बाद के लोक रामायणों में विस्तारपूर्वक वर्णित है। उदाहरणार्थ, आंध्र प्रदेश के लोकगीतों में शांता, एक महत्त्वपूर्ण व्यक्ति थी जिन्होंने पारिवारिक अनुष्ठानों में भाग लिया था।

क्या यह बाद में किया गया प्रक्षेप है? वास्तव में आज जो कहानियां हम मानते हैं रामायण का भाग हैं वे दो हज़ार वर्ष पहले उसे संस्कृत में लिखित रूप दिए जाने पर उसका भाग नहीं थी। लक्ष्मण की पत्नी, उर्मिला, की कहानी जिसमें वे चौदह वर्ष लक्ष्मण की ओर से सोईं, मेघनाद की पत्नी, कुलीन सुलोचना की कहानी, जो रणभूमि से उनका शव ले आईं और लक्ष्मण रेखा की लोकप्रिय कहानी सभी पहली बार क्षेत्रीय और लोक रामायणों में बताईं गईं, जो हज़ार वर्षों से भी कम पहले रचे गए।

इसी समय महाभारत को भी लिखित रूप दिया गया। उसमें रामोपाख्यान अर्थात राम की कहानी है, जो मार्कण्डेय ऋषि ने पांडवों को बताई। उसमें ब्रह्मा ने दुंदुभी नामक गंधर्वी को मंथरा बनकर पुनर्जन्म लेकर कैकेई के मन में विष घोलने के लिए कहा ताकि राम वन में जाकर रावण का वध कर सकें। यह कहानी वाल्मीकि रामायण में नहीं पाई जाती है।

हाल ही में, कोलकाता में कुछ विद्वानों को वन्हि पुराण का छठीं सदी का रामायण मिला जिसमें परंपरागत सात काण्ड के बजाय केवल पांच काण्ड हैं। उसकी शुरुआत में दशरथ ने राम को राजा बनाने का निर्णय लिया। फिर सीता का अपहरण हुआ, जिसके बाद राम ने रावण का वध करके सीता को बचाया। अंत में राम का राज्याभिषेक हुआ। इस वर्णन में राम द्वारा सीता को त्यागने का कोई उल्लेख नहीं है।

बौद्ध धर्म में राम की बहुत अलग समझ है। दशरथ जातक कथा में बनारस के राजा दशरथ की कहानी है। उनके राम, लक्खन और सीता नामक दो पुत्र और एक पुत्री थे। अपनी पत्नी के निधन के बाद उन्होंने पुनर्विवाह करके उन्हें भद्दा नमक पुत्र जन्म हुआ। अपनी दूसरी पत्नी की महत्त्वाकांक्षाओं को देखकर दशरथ ने अपनी पहली तीन संतानों को वन में रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि ज्योतिषों के अनुसार उनका निधन 12 साल बाद होना निश्चित था और उन्हें तब लौटने के लिए कहा। राम, लक्खन और सीता वन में चले गए।

लेकिन राजा का नौ साल बाद निधन हुआ और भद्दा ने राजा बनने से इनकार किया। वह वन में जाकर उसने राम से राजा बनने की विनती की। राम ने भी इनकार किया। “मैंने हमारे पिताजी को वचन दिया था कि मैं बारह साल वन में रहूंगा। आप लक्खन और सीता के साथ लौटें और तीन साल मेरे लौटने तक राज करें।” तीन साल बाद राम लौटें और राजा घोषित किए गए। बनारस के ज्ञानी राजकुमार, राम-पंडित बोधिसत्त्व अर्थात अपने पूर्व जन्म में बुद्ध थे। क्या यह कहानी वाल्मीकि रामायण से प्रेरित है या क्या वाल्मीकि रामायण इससे प्रेरित है?

जैन रामायण के अनुसार कैकेई उदार थी। राम कैकेई के पुत्र, भरत, को वन में जाने से रोकने के उद्देश्य से स्वयं वन में जाकर तपस्वी बनें। इस रामायण में रावण का लक्ष्मण के हाथों वध हुआ जबकि राम जैन धर्म की सीखों के अनुसार अहिंसक बने रहें।

5वीं और 10वीं सदियों के बीच राम को महान राजा, महान नायक और विष्णु का अवतार दिखाया गया। हम यह विभिन्न पुराणों, और भास और कालिदास के संस्कृत नाटक और कविताओं में पाते हैं। भवभूति के 9वीं सदी के संस्कृत नाटक, महावीरचरित, में राम सीता को उनके स्वयंवर से बहुत पहले विश्वामित्र के आश्रम में मिलें थे। जनक के भ्राता, कुशध्वज, सीता को वहाँ ले गए थे। संस्कृत काव्यों में परंपरागत रूप से नायक और नायिका स्वयंवर से पहले बाग में मिलकर प्रेम में पड़ जाते थे। लेकिन दसवीं सदी के बाद एक महत्त्वपूर्ण बदल हुआ।

राम को परमात्मा माना जाने लगा। और उनकी कहानी क्षेत्रीय भाषाओँ में बताई गई: तमिल, तेलुगु, कन्नड़, ओड़िआ, बंगाली, मराठी और अंत में 15वीं सदी के बाद अवधी जैसी उत्तर भारतीय भाषाओँ में। अवधी में रचित रामचरितमानस में तुलसीदास ने दिखाया कैसे राम और रावण दोनों शिव तथा शक्ति के पूजक थे। इससे उन्होंने उस समय शिव और विष्णु भक्तों के बीच तथा वैदिकों और तांत्रिकों के बीच प्रतिद्वंद्व को कम करने का प्रयास किया।

समय के साथ रामायण की कई कहानियां बदली हैं। वाल्मीकि रामायण में अहल्या गौतम ऋषि के श्राप से अदृश्य बन गई थी। अगले रामायणों में वे एक पत्थर में बदल गई और राम के पैर के स्पर्श से श्राप से मुक्त हुई। वाल्मीकि रामायण में शबरी राम से मातंग आश्रम में मिली। शबरी का राम को बेर खिलाने वाली आदिवासी या ‘निचली’ जाति की महिला के रूप में उल्लेख केवल 18वीं सदी के बाद भक्ति परंपरा में हुआ। इन बदलावों से यह स्पष्ट है कि भारतीय समाज में महिलाओं का दर्जा बदल रहा था, जाति व्यवस्था का महत्त्व बढ़ गया था और कैसे इन सामाजिक-राजनीतिक संबंधों में परमात्मा की अपनी जगह थी।

किन्नर समुदाय का भी अपना मौखिक रामायण है। उसके अनुसार जब राम लंका से लौटें तब उन्होंने पाया कि कुछ किन्नर अयोध्या के बाहर रह रहें थे। उन्हें पूछने पर उन्होंने राम से कहा कि जब राम अयोध्या छोड़कर वन में रहने जा रहें थे तब उन्होंने उनका पीछा कर रहें पुरुष और स्त्रियों को अयोध्या लौटने के लिए कहा था। लेकिन राम ने किन्नरों से कुछ नहीं कहा, जो न पुरुष हैं न स्त्री। इसलिए, ये किन्नर अयोध्या के बाहर राम के लौटने के लिए रुके रहें, इस आशा में कि राम उन्हें अयोध्या ले जाएंगे। इस प्रकार, आपकी पसंद का रामायण चुनें। या सभी रामायणों का आनंद लें। है न उदारतावाद का उत्कृष्ट उदाहरण?

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